जगजीवन की यात्रा पहुंची लोकतंत्र के मंदिर
- 5 minutes read - 981 wordsजगजीवन की खुराक बाँटने की निरंतर यात्रा में — जगजीवन: जीवन से बढ़कर जीना — अब भारत के सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान, भारतीय संसद, तक पहुँच गयी है।
यह मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गर्व का क्षण था कि मैं अपनी पुस्तक भारत सरकार के माननीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी को भेंट कर सका, जिन्होंने इस पुस्तक के लिए अत्यंत प्रेरणादायक पस्तावना भी लिखी है।
संसद भवन, जिसे लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, वहाँ उपस्थित होना केवल एक औपचारिक भेंट नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभावना को निकट से अनुभव करने का अवसर था।

इसी के कुछ छण प्रस्तुत है
प्राक्कथन — जगजीवन : जीवन से बढ़कर जीना
माननीय मेघवाल जी को संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में पुस्तक की प्रतियाँ व्यक्तिगत रूप से सौंपना मेरे लिए विशेष क्षण था।
एक जनसेवक होने के साथ-साथ वे साहित्य और विचार की गहरी समझ रखने वाले व्यक्तित्व हैं। उनके प्रोत्साहन ने मुझे यह जीवन कथा लिखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने अपने प्राक्कथन में लिखा —
आप्त पुरुषों की जीवन कथा न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्षों को उजागर करती है, बल्कि हमें जीवन के उच्च आदर्शों सत्य, सेवा, और समर्पण के प्रति प्रेरित भी करती है। ऐसे व्यक्तियों का जीवन एक प्रकाश स्तंभ की तरह होता है, जो समाज को दिशा दिखाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करता है।
श्री कुलदीप सिंह द्वारा लिखी गई प्रस्तुत पुस्तक ‘जगजीवन: जीवन से बड़ा जीना’ लेखक के परनाना स्वर्गीय श्री जग्गूराम की जीवनी है जो हमें यह सिखाती है कि असंभव को संभव बनाने का रास्ता केवल साहस और विश्वास से प्रशस्त होता है। पुस्तक की रचना करते हुए लेखक के मन में अपने बाल्य काल की स्मृतियां सजीव हो उठती हैं और वह अपने परनाना द्वारा उसे दिए गए नाम ‘दलीप’ को याद कर भाव विभोर हो जाता है। लेखक के लिए ‘दलीप’ सिर्फ नाम नहीं है बल्कि उसके लिए यह जगजीवन है।
लेखक के परनाना श्री जग्गूराम ने अपने दृढ़ संकल्प, चारित्रिक दृढ़ता और दूरदर्शिता से न केवल अपने दौर को प्रभावित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने। पुस्तक में लेखक ने अपनी लेखनी के माध्यम से उन मूल्यों, आदर्शों और प्रेरणाओं को जीवंत किया है, जिन्हें उनके परनाना श्री जग्गूराम ने अपने जीवन के दौरान वास्तव में जीया।
यह पुस्तक मानव जीवन के उन असाधारण पहलुओं का दस्तावेज है, जो समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं। पुस्तक के कुल दस अध्यायों में समाहित श्री जग्गूराम के जीवन की कहानियाँ न केवल उनके युग की चुनौतियों और संदर्भों को समझने में मदद करती हैं, बल्कि हमें अपने जीवन में भी उच्च लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
यह पुस्तक अपने परनाना के प्रति लेखक की एक श्रद्धांजलि है जिसने अपने जीवन को एक मिसाल बनाया और जिससे प्रेरित होकर पाठकगण अपने भीतर की संभावनाओं की तलाश कर सकते हैं। मुझे आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने और सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगी।
(अर्जुन राम मेघवाल)
विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार),
संसदीय कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार
अधिक जानकारी के लिए- 📕 ‘जगजीवन: जीवन से बड़ा जीना’
संसद यात्रा — लोकतंत्र को जीवंत रूप में देखना
इस अवसर पर मुझे लोकसभा की कार्यवाही को सार्वजनिक दीर्घा से देखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। टीवी पर दिखने वाली संसद और वास्तविक संसद के वातावरण में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को विचार-विमर्श करते देखना लोकतंत्र की जीवंतता का अद्भुत अनुभव था। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इतने विविध विचारों को संतुलित ढंग से संचालित करना प्रेरणादायक था।
माननीय मंत्री जी और उनकी टीम का आतिथ्य अत्यंत स्नेहपूर्ण रहा। मेरे साथ मेरी पत्नी और मेरे चचेरे भाई मुकेश कुमार, जो मंत्री जी की टीम का हिस्सा हैं, भी इस यात्रा में साथ रहे।

हमने संसद परिसर की सांस्कृतिक दीर्घाओं का अवलोकन किया, जहाँ भारत की विविधता और सभ्यता का सुंदर चित्रण है। पुराने संसद भवन का केंद्रीय कक्ष विशेष रूप से भावुक कर देने वाला अनुभव था — वही स्थान जहाँ स्वतंत्र भारत की दिशा तय हुई, संविधान पर चर्चा हुई और राष्ट्र निर्माण की ऐतिहासिक नींव रखी गई।
उस क्षण मन से एक ही भाव निकला —
🇮🇳🇮🇳 जगजीवन भारत — अमर भारत। 🇮🇳🇮🇳
संसद परिवार के साथ जगजीवन को साझा करना
मैं मंत्री जी के समस्त स्टाफ का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
विशेष धन्यवाद मुकेश कुमार को, जिन्होंने इस पूरे कार्यक्रम का सुंदर समन्वय किया और पुस्तक के समीक्षक भी रहे। मंत्री जी स्टाफ में — राजीव जी, तेजाराम जी तथा अन्य साथियों — को जगजीवन की हस्ताक्षरित प्रतियाँ भेंट करना अत्यंत सुखद अनुभव रहा।

उनकी जिज्ञासा और उत्साह ने इस यात्रा को और भी सार्थक बना दिया।
जगजीवन के बारे में
📕 जगजीवन: जीवन से बढ़कर जीना एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पुस्तक है, जो श्री जग्गूराम जैसे दूरदर्शी, सरल और गहन विचारों वाले व्यक्तित्व के जीवन-सार को संजोती है। उनके आशीर्वाद, मूल्यों और जीवन-दृष्टि ने कई पीढ़ियों को आकार दिया है, और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

लेखक ने अपने बचपन की स्मृतियों को मिलाकर इस महान व्यक्तित्व की सीखों को दस अध्यायों में समाहित किया है। इन अध्यायों में जीवन की असली विरासत, जिम्मेदारियों का महत्व, उतार-चढ़ाव से जूझने की शक्ति, हुनर का मूल्य, छिपी क्षमताएँ, पारिवारिक जुड़ाव, संघर्ष समाधान, अनुशासन, कर्म की शक्ति और उच्च मूल्यों के साथ जीवन के समापन जैसी महत्वपूर्ण बातों को सरल, प्रेरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक सिर्फ एक जीवनी नहीं—जीवन जीने की कला का सहज, व्यावहारिक मार्गदर्शन है। यह पाठकों को जीवन की सरलता में महानता खोजने, रिश्तों को संवारने, और अपने कर्मों से जीवन को ‘जीवन से बड़ा’ बनाने की प्रेरणा देती है।
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