नीचे आपको ऐसे पेज मिलेंगे जो वर्गीकरण शब्द का उपयोग करते हैं “Book Launch”
Apr, 2026 - Post
जगजीवन की यात्रा पहुंची लोकतंत्र के मंदिर
जगजीवन की खुराक बाँटने की निरंतर यात्रा में — जगजीवन: जीवन से बढ़कर जीना — अब भारत के सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान, भारतीय संसद, तक पहुँच गयी है।
यह मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गर्व का क्षण था कि मैं अपनी पुस्तक भारत सरकार के माननीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी को भेंट कर सका, जिन्होंने इस पुस्तक के लिए अत्यंत प्रेरणादायक पस्तावना भी लिखी है।
संसद भवन, जिसे लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, वहाँ उपस्थित होना केवल एक औपचारिक भेंट नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभावना को निकट से अनुभव करने का अवसर था।
और पढ़ें
Mar, 2026 - Post
आईसीयू में मिली एआई और जगजीवन की खुराक!
हम अक्सर सुनते आए हैं — समय बदल रहा है।
लेकिन एआई के युग में बदलाव केवल हो नहीं रहा, बल्कि तेज़ी से दौड़ रहा है।
आज एआई हमारे लेखन, निर्णय लेने, सीखने और सोचने तक का हिस्सा बन चुका है।
हम में से कई लोग अब डॉक्टर की सलाह सुनने के बाद भी एआई से पूछते हैं —
क्या रिपोर्ट सही है? क्या इलाज ठीक दिशा में है? आगे क्या होगा?
और पढ़ें
Jan, 2026 - Post
जगजीवन की खुराक: परिवार से मिलते जुलते रहें!
परिवार के साथ समय बिताने के लिए रोज़मर्रा की दिनचर्या से समय निकालना अक्सर जितना आसान होना चाहिए, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल लगता है। व्यस्त दिनचर्या, लंबी यात्राएँ, काम का दबाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ, दूरी या यहाँ तक कि अनसुलझी गलतफहमियाँ भी धीरे-धीरे बहाने बन जाती हैं। फिर भी, हम सभी यह सच्चाई जानते हैं कि मानसिक शांति और खुशी के लिए पारिवारिक मिलन बेहद ज़रूरी है।
हम पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने और जीवन भर याद रहने वाली यादें बनाने के लिए त्योहार, जन्मदिन, वर्षगांठ और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों का जश्न मनाते हैं। जब किसी कारण से हम इन पलों को खो देते हैं तो ये हमारी व्यक्तिगत हानि ही होती है, चाहे हम अपने आप को कितना भी आश्वासन दें और अपने आप को सही ठहराते रहें।
और पढ़ें
Dec, 2025 - Post
📕उपलब्ध है! जगजीवन: जीवन से बढ़कर जीना
📕 जगजीवन: जीवन से बढ़कर जीना एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पुस्तक है, जो श्री जग्गूराम जैसे दूरदर्शी, सरल और गहन विचारों वाले व्यक्तित्व के जीवन-सार को संजोती है। उनके आशीर्वाद, मूल्यों और जीवन-दृष्टि ने कई पीढ़ियों को आकार दिया है, और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
मैंने अपने बचपन की स्मृतियों को मिलाकर इस महान व्यक्तित्व की सीखों को दस अध्यायों में समाहित किया है। इन अध्यायों में जीवन की असली विरासत, जिम्मेदारियों का महत्व, उतार-चढ़ाव से जूझने की शक्ति, हुनर का मूल्य, छिपी क्षमताएँ, पारिवारिक जुड़ाव, संघर्ष समाधान, अनुशासन, कर्म की शक्ति और उच्च मूल्यों के साथ जीवन के समापन जैसी महत्वपूर्ण बातों को सरल, प्रेरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
और पढ़ें